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छत का गिरा मलबा, आंगन में सो रहे पूरे परिवार की हुई मौत
भीतर से बंद पड़ा घर बिल्कुल शांत था क्योंकि उसमें रहने वाले लोग अब नहीं बचे थे. बची थी सिर्फ उनकी मौत की निशानियां. पूरे परिवार पर जर्जर मकान की छत गिरी तो उनकी चीख भी मलबे के ढ़ेर में दब गई.

लखनऊ- रात के वक्त छत का मलबा एक पूरे परिवार पर मौत बनकर टूट पड़ा. गहरी नींद में सो रहे परिवार के पांचों सदस्य इस बात से अंजान थे, कि उनमें से कोई भी अगली सुबह की किरण नहीं देख पाएगा. सतीश और उसके पूरे परिवार पर जर्जर मकान की छत गिरी तो उनकी चीख भी मलबे के ढ़ेर में दब गई. इसलिए आस-पास के लोगों को भी इस अनहोनी की भनक तक नहीं लगी.

तीन घंटे तक मलबे में दबा रहा पूरा परिवार

सुबह करीब साढ़े 6 छह बजे तक सतीश के घर में कोई सुगबुगाहट या हलचल नहीं दिखी, भीतर से बंद पड़ा घर बिल्कुल शांत था क्योंकि उसमें रहने वाले लोग अब नहीं बचे थे. बची थी सिर्फ उनकी मौत की निशानियां.

घटना की मंजर देख दहल गए लोग

पड़ोसी बताते हैं कि सतीश के घर सुबह साढ़े 5 बजे से ही हलचल शुरू हो जाती थी, बच्चें स्कूल के लिए तैयार होते, सतीश बाहर टहलने के लिए निकलते लेकिन शनिवार को सुबह 6:30 बजे के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो किसी अनहोनी की अशंका से पड़ोसियों ने छत से उनके घर में झांका. इसके बाद जो उन्होंने मंजर देखा वो दिल दहला देने वाला था.

रात को आई थी गिरने की आवाज़

सतीश के एक पड़ोसी ने बताया कि रात के वक्त कुछ गिरने की तेज आवाज़ आई थी मगर कोई चीख-पुकार सुनाई नहीं दी. अगर समय रहते इस घटना की जानकारी मिली होती तो शायद पांचों लोगों बचा लिया गया होता.

कॉलोनि में पसरा मातम

सुबह कुछ लोगों ने खिड़की से जब सतीश के घर में झांका तो मलबे के नीचे दबे सतीश की पत्नि सलोनी का हाथ देख हैरान रह गए. इसके बाद छत से झांका तो मामले का खुलासा हुआ. जिसके बाद पूरे कॉलोनी में मातम पसर गया. सूचना पाकर डीएम सूर्यपाल गंगवार, ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर कानून व्यवस्था उपेंद्र अग्रवाल सहित अन्य अफसर मौके पर पहुंचे.

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