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धरती की ओर बढ़ रहा खतरनाक उल्कापिंड, NASA ने तय कर दी टकराने की तारीख; 22 परमाणु बम जितना होगा विस्फोट
NASA के वैज्ञानिकों के अनुसार, 159 वर्ष बाद उल्का पिंड के टकराने की तारीख (24 सितंबर, 2182) का पता चला है.

Meteorite Hits Earth: धरती पर रहने वाला साधारण इंसान कई तरह की खगोलीय घटनाओं से अंजान है, लेकिन वैज्ञानिक सतर्क रहते हैं और इस संबंध में समय-समय पर जानकारी मुहैया कराते रहते हैं. इसी कड़ी में नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने ताजा जानकारी दी है कि  24 सितंबर, 2182 को एक उल्का पिंड धरती से टकराएगा.

 इसके टकराने की स्थिति में 1000 किलोमीटर धरती पूरी तरह खत्म हो जाएगी, क्योंकि यह तेज वेग से टकाराने वाला है. नासा के वैज्ञानिकों ने इस उल्का पिंड का नाम बेनू रखा है.

22 परमाणु बम जितना होगा विस्फोट

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, 159 वर्ष बाद उल्का पिंड के टकराने की तारीख (24 सितंबर, 2182) का पता चला है। यह भी पता चला है कि यह धरती से टकराएगा तो इस प्रभाव 22 परमाणु बम जितना होगा.

सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके टकराने से कितनी तबाही होगी. बताया जा रहा है कि जिस जगह बेनू उल्का पिंड टकराएगा उसके 1000 किलोमीटर के दायरे में कुछ भी नहीं बचेगा, बल्कि सबकुछ तबाह हो जाएगा

क्या होते हैं उल्का पिंड 

सामान्य भाषा में समझें तो आसमान से धरती पर गिरे पिंडों के अवशेष को उल्का पिंड कहा जाता है। ये हजारों साल से ऐसे ही पड़े हुए हैं.  आकाशीय पिंड जब भी अंतरिक्ष की कक्षा में आपस में टकराते हैं तो ये गुरुत्वाकर्षण के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे टक्कर होती है और टूटफूट भी होती है, इसके बाद टूट के अंश धरती पर गिरते हैं, जिससे नुकसान का खतरा रहता है. 

उधर, नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि वह इसकी दिशा बदले का प्रयास करेंगे, लेकिन यह टकराया तो धरती के 1000 किलोमीटर के दायरे को बहुत नुकसान पहुंचेगा. 

प्रत्येक 6 साल में धरती के बगल से निकलता है उल्का पिंच

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, उल्कापिंड सामान्य तौर पर प्रत्येक 6 वर्ष के दौरान एक बार धरती के बगल से निकलते हैं. ज्यादातर बार इनके टकराने के आसार कम होते हैं, लेकिन 159 वर्ष बाद 24 सितंबर, 2182 को एक उल्का पिंड के धरती से टकराने के आसार हैं.

इसका नाम बेनू रखा गया है. वहीं, इसके नुकसान का आंकलन करने के अलावा इससे धरती को बचाने की कवायद भी नासा के वैज्ञानिकों ने शुरू कर दी है. नासा के वैज्ञानिक इस खतरे को टालने और बेनू की दिशा बदलने की कोशिश में अभी से जुट गए हैं.

 

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