नई दिल्ली: कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को 22 अप्रैल को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है. इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस घटना के बाद देशभर में गुस्सा देखने को मिला और आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी.
अब इस हमले की बरसी से ठीक एक दिन पहले भारतीय सेना ने आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है. सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि जब इंसानियत की सीमाएं पार होती हैं, तो जवाब भी उतना ही निर्णायक होता है. सेना ने यह भी संकेत दिया कि कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें लांघने का परिणाम गंभीर होता है.
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, सख्त संदेश
भारतीय सेना ने अपने संदेश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया, जो पहलगाम हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ चलाया गया एक बड़ा सैन्य अभियान था. यह पोस्ट न सिर्फ एक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख पर अडिग है.
When boundaries of humanity are crossed, the response is decisive.
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) April 21, 2026
Justice is Served.
India Stands United.#SindoorAnniversary #JusticeEndures #NationFirst pic.twitter.com/rtgYu9Hg11
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस अभियान की सफलता की सराहना करते हुए सेना के साहस और पराक्रम की प्रशंसा की थी.
पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई
22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद भारत ने 7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई की. इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया.
इस कार्रवाई के दौरान कुल 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए. इनमें बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके शामिल थे, जिन्हें क्रमशः जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख गढ़ के रूप में जाना जाता है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में करीब 100 आतंकवादी मारे गए. यह ऑपरेशन भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त कार्रवाई का उदाहरण था, जिसमें तीनों सेनाओं ने मिलकर काम किया.
किन-किन ठिकानों को बनाया गया निशाना
इस सैन्य अभियान में कुल 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें 4 पाकिस्तान में और 5 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित थे. मुजफ्फराबाद और कोटली जैसे इलाके भी इस कार्रवाई की जद में आए.
इन ठिकानों को उन आतंकी संगठनों के प्रमुख कमांड सेंटर माना जाता था, जिनका संबंध पहले भी बड़े हमलों से रहा है, जैसे 2019 का पुलवामा हमला और 2008 का मुंबई हमला.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का जवाब
भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और जवाबी हमले की कोशिश की. हालांकि, भारतीय सेना ने इन प्रयासों को विफल कर दिया.
इसके बाद भारत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. महज कुछ घंटों के भीतर नूर खान समेत कुल 11 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें रफीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चुनियन, सरगोधा, स्कर्दू, भोलारी और जैकोबाबाद जैसे स्थान शामिल थे.
कूटनीतिक स्तर पर भी बड़ा कदम
इस हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की. इस कदम को भारत की रणनीतिक नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा गया.
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाएगा, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है.
ऑपरेशन सिंदूर की प्रमुख उपलब्धियां
इस सैन्य कार्रवाई के कई अहम परिणाम सामने आए—
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