Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में जल संकट के कारण कृषि गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था.
रिपोर्टों के मुताबिक, पानी की कमी का सबसे अधिक असर सिंध प्रांत में दिखाई दे रहा है. कराची समेत कई इलाकों में जल आपूर्ति को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है. किसान संगठनों, राजनीतिक नेताओं और जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.
आबादी का बड़ा हिस्सा प्रभावित
सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी का असर पाकिस्तान की बड़ी आबादी पर पड़ रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में संकट और गहरा सकता है. वहीं भारत की ओर से अब तक अपने फैसले में किसी बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं.
भारत ने दोहराया अपना रुख
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का निर्णय लिया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने जल संसाधनों को उन लोगों तक नहीं पहुंचने देगा जिन्हें वह आतंकवाद का समर्थन करने वाला मानता है. भारत लगातार यह कहता रहा है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते.
सिंध के सिंचाई नेटवर्क पर दबाव
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिंधु नदी पर स्थित सुक्कुर बैराज के आसपास जल संकट अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है. यह बैराज सिंध और बलूचिस्तान के विशाल कृषि क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जल प्रवाह में कमी के कारण कई प्रमुख नहरों में पानी का स्तर घट गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी नहर में लगभग 64 प्रतिशत, राइस कैनाल में करीब 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी दर्ज की गई है. इससे सिंचाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो गया है.
प्रांतों के बीच पानी बंटवारे को लेकर विवाद
जल संकट के बीच पाकिस्तान के भीतर पानी के वितरण को लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं. सिंध प्रशासन ने पंजाब पर तय हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाया है. सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब को निर्धारित मात्रा से अधिक जल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अन्य क्षेत्रों में पानी की कमी और बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल प्रबंधन और वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में कृषि क्षेत्र और आम लोगों के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
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