क्रूड ऑयल पर निर्भरता घटाने की तैयारी! अब 100% इथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, नितिन गडकरी ने बताया प्लान

केंद्र सरकार ने परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को मंजूरी दे दी है.

Vehicles will now run on 100% ethanol Nitin Gadkari outlines the plan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले की जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक नियमों और दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया जा चुका है. सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है.

जल्द लॉन्च हो सकते हैं नए वाहन

नितिन गडकरी के अनुसार, ऑटोमोबाइल उद्योग इस बदलाव के लिए तैयार है और कई वाहन निर्माता कंपनियां ऐसे मॉडल बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं जो पूरी तरह इथेनॉल पर चल सकेंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ सप्ताहों में नई तकनीक से लैस वाहन भारतीय बाजार में पेश किए जा सकते हैं.

ईंधन लागत में मिल सकती है राहत

सरकार का मानना है कि इथेनॉल पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक किफायती विकल्प साबित हो सकता है. इससे न केवल उपभोक्ताओं के ईंधन खर्च में कमी आ सकती है, बल्कि देश के आयात बिल पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, ऐसे में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या है इथेनॉल?

इथेनॉल एक प्रकार का जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे शर्करा और स्टार्च युक्त पदार्थों के किण्वन (फर्मेंटेशन) से तैयार किया जाता है. इसे वाहनों के लिए पर्यावरण अनुकूल ईंधन के रूप में देखा जाता है.

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्का, मीठे ज्वार, चुकंदर और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है. इसके अलावा कृषि अवशेषों और जैविक अपशिष्ट से भी उन्नत तकनीक के जरिए इथेनॉल बनाया जा सकता है.

इथेनॉल की प्रमुख श्रेणियां

फर्स्ट जनरेशन इथेनॉल: गन्ने का रस, मक्का, चुकंदर, मीठा ज्वार और अन्य शर्करा या स्टार्च आधारित फसलों से तैयार किया जाता है.

सेकेंड जनरेशन इथेनॉल: कृषि अवशेषों जैसे धान की भूसी, गेहूं के अवशेष, बांस और अन्य लिग्नोसेल्यूलोसिक सामग्री से बनाया जाता है.

थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल: यह मुख्य रूप से एल्गी (शैवाल) आधारित तकनीक पर आधारित है और अभी विकास के चरण में है.

E85 ईंधन को भी मिला बढ़ावा

हाल ही में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन को भी बढ़ावा दिया है. इस मिश्रित ईंधन में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है. इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है.

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों में ही होगा उपयोग

100 प्रतिशत इथेनॉल या E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग केवल उन वाहनों में किया जा सकता है जिनके इंजन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप डिजाइन किए गए हों.

भारत में पहले से कुछ वाहन और दोपहिया मॉडल ऐसे हैं जो उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग करने में सक्षम हैं. आने वाले समय में इस श्रेणी में और नए विकल्प जुड़ने की उम्मीद है.

सरकार का मानना है कि यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है.

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