BrahMos-II: भारत-रूस मिलकर बना रहे हल्की और हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल, बढ़ेगी मारक क्षमता! जानें ताकत

ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत की रक्षा क्षमताओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस मिसाइल के एक नए और अधिक उन्नत हाइपरसोनिक संस्करण पर काम कर रहे हैं.

India and Russia jointly developing the lightweight and hypersonic BrahMos-II missile
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

BrahMos-II Missile: ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत की रक्षा क्षमताओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस मिसाइल के एक नए और अधिक उन्नत हाइपरसोनिक संस्करण पर काम कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में आकार और वजन दोनों में छोटा होगा, जबकि इसकी मारक क्षमता और तकनीकी विशेषताएं कहीं अधिक आधुनिक होंगी.

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना से जुड़ी जानकारी साझा की.

ब्रह्मोस सिस्टम को और आधुनिक बनाने की तैयारी

डेनिस अलीपोव के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में भविष्य में और भी कई तकनीकी सुधारों की संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि यह मिसाइल पहले जमीनी प्लेटफॉर्म के लिए विकसित की गई थी, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार नौसेना, पनडुब्बी और वायुसेना के संस्करणों तक हो चुका है.

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने वर्षों के विकास और परीक्षणों के बाद टैक्टिकल क्रूज मिसाइल ट्रायड की क्षमता हासिल कर ली है, जिससे उसे तेज और सटीक स्ट्राइक क्षमता प्राप्त हुई है.

मौजूदा ब्रह्मोस से काफी हल्का होगा नया संस्करण

रिपोर्टों के अनुसार, विकसित की जा रही ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक मिसाइल का वजन लगभग 1.3 से 1.5 टन के बीच हो सकता है.

तुलना करें तो वर्तमान में जमीनी और नौसैनिक प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का वजन लगभग 3 टन है, जबकि एयर-लॉन्च संस्करण का वजन 2.2 से 2.5 टन के बीच माना जाता है.

नई मिसाइल के हल्के होने से इसकी तैनाती अधिक लचीली हो सकती है और इसे विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से एकीकृत किया जा सकेगा.

स्टील्थ तकनीक से लैस होगा नया ब्रह्मोस

जानकारी के अनुसार, ब्रह्मोस-II को स्टील्थ क्षमताओं के साथ विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य मिसाइल को दुश्मन के रडार और निगरानी प्रणालियों से बचाते हुए लक्ष्य तक पहुंचाना है.

कम रडार सिग्नेचर और अत्यधिक गति का संयोजन इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में एक प्रभावी हथियार बना सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी क्षमताएं भविष्य के तेज और सटीक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

हाइपरसोनिक गति होगी सबसे बड़ी ताकत

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक श्रेणी की मिसाइल होगी, जिसकी गति 7,400 से 9,800 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच हो सकती है.

इतनी अधिक रफ्तार के कारण लक्ष्य तक पहुंचने का समय बेहद कम होगा और कई आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसका पता लगाना या इसे रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी हो सकेगी तैनाती

भविष्य में इस हल्के संस्करण को स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस सहित अन्य एयर प्लेटफॉर्म से लॉन्च करने की संभावना जताई जा रही है. यदि ऐसा होता है तो भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.

कौन हो सकते हैं संभावित ग्राहक?

संकेत मिल रहे हैं कि शुरुआती चरण में ब्रह्मोस-II का जमीनी संस्करण भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा सकता है. इसके बाद नौसेना और वायुसेना के संस्करणों पर आगे काम किया जाएगा.

भारतीय सेनाओं के अलावा रूस भी इसका संभावित उपयोगकर्ता हो सकता है. वहीं, ब्रह्मोस मिसाइल में पहले से रुचि दिखा चुके कई विदेशी देशों को भी भविष्य में इसका निर्यात किया जा सकता है.

संभावित खरीदारों में फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और ब्रुनेई जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान और मिस्र जैसे खाड़ी देशों की भी इसमें रुचि रहने की संभावना जताई जा रही है.

भविष्य में साइप्रस, ब्राजील और चिली जैसे देशों को भी संभावित ग्राहकों की सूची में देखा जा रहा है.

भारत की रक्षा शक्ति को मिलेगा नया आयाम

यदि ब्रह्मोस-II परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो यह भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता को नई ऊंचाई दे सकती है. हल्के वजन, स्टील्थ तकनीक और अत्यधिक गति का संयोजन इसे आने वाले वर्षों में भारतीय सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकता है.

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