अमेरिकी दबाव बेअसर! रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा भारत, होर्मुज खुलने से पहले बड़ा मास्टरस्ट्रोक

India Oil Imports: अमेरिका की सख्ती और चेतावनियों के बावजूद भारत ने जून महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. जून में रूस से तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है.

India masterstroke before the opening of Hormuz Record oil purchases from Russia and the UAE—US
Image Source: ANI/ File

India Oil Imports: अमेरिका की सख्ती और चेतावनियों के बावजूद भारत ने जून महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. जून में रूस से तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है.

यूएई से भी बढ़ी तेल की खरीद

रूस के अलावा भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भी तेल आयात में बढ़ोतरी की है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही ज्यादा तेल खरीदकर भंडार मजबूत करने की रणनीति अपनाई है.

वेनेजुएला बना बड़ा सप्लायर

जून में वेनेजुएला भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया. वहीं सऊदी अरब से भी तेल आयात जारी रहा. दूसरी तरफ अमेरिका से तेल खरीद में कमी देखने को मिली है.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर थी चिंता

हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता बनी हुई थी. यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है. किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम के बाद तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है. इसके बावजूद बाजार में सतर्कता बनी हुई है.

भारत ने अपनाई विविध रणनीति

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है. अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता. इसी वजह से रूस, यूएई, सऊदी अरब और वेनेजुएला जैसे कई देशों से तेल खरीद बढ़ाई जा रही है.

आगे भी बढ़ सकता है रूसी तेल आयात

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से मिलने वाला रियायती तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए अभी भी आकर्षक बना हुआ है. इसी कारण आने वाले समय में भी रूस भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रह सकता है. भारत ने संभावित आपूर्ति संकट से बचने के लिए पहले ही वैकल्पिक स्रोतों से खरीद बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी कर ली है.

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