Jharkhand Rajya Sabha Results: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने नया राजनीतिक संदेश दिया है. दो सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्ता और विपक्ष के बीच चली रणनीतिक लड़ाई का परिणाम कई नेताओं की उम्मीदों से अलग रहा. एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम ने जीत हासिल कर राज्यसभा की सीट पक्की कर ली है, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा.
परिमल नाथवानी ने दर्ज की जीत
मतगणना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को कुल 30 वोट प्राप्त हुए. पर्याप्त समर्थन मिलने के साथ ही उनकी जीत लगभग तय मानी गई. नाथवानी की जीत को एनडीए के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद व्यापक समर्थन जुटाने में सफलता हासिल की.
झामुमो के बैद्यनाथ राम भी पहुंचे राज्यसभा
राज्यसभा की दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की. झामुमो के लिए यह परिणाम राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी अपने उम्मीदवार को संसद के उच्च सदन तक पहुंचाने में सफल रही. इस तरह राज्यसभा की दो सीटों में एक सीट झामुमो और दूसरी सीट एनडीए समर्थित उम्मीदवार के खाते में गई.
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को मिली हार
महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा था. हालांकि चुनावी गणित और सहयोगी दलों के समर्थन के बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर सके. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि पार्टी को महागठबंधन के भीतर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया.
तीन वोटों को लेकर दिनभर बना रहा संशय
मतगणना के दौरान तीन वोटों को लेकर लगातार चर्चा होती रही. झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि इन वोटों की स्थिति शुरू में स्पष्ट नहीं थी और उन्हें होल्ड पर रखा गया था. बाद में जानकारी सामने आई कि इन तीनों वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया. इन वोटों को लेकर पूरे दिन राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म रहा.
महागठबंधन के भीतर क्रॉस वोटिंग की अटकलें
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद महागठबंधन के भीतर गड़बड़ी और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं. सूत्रों का कहना है कि राजद और भाकपा-माले के कुछ विधायकों के मतदान को लेकर सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि गठबंधन के सभी सहयोगी दल पूरी तरह एकजुट नहीं रह पाए, जिसका सीधा असर कांग्रेस उम्मीदवार के प्रदर्शन पर पड़ा.
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