NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर इस बार किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है. परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं. 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा से एक दिन पहले देशभर में बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी सिस्टम और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की गहन समीक्षा की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि यह अभ्यास परीक्षा के दिन किसी भी संभावित समस्या को पहले से पहचानने और उसका समाधान तैयार करने में मदद करेगा.
सुरक्षा व्यवस्था की होगी पूरी पड़ताल
शनिवार सुबह 9 बजे शुरू होने वाली यह मॉक ड्रिल देर शाम तक चलेगी. इसमें देशभर के परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल, प्रवेश प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभ्यास में 2.5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे. सभी परीक्षा केंद्र पहले ही राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को सौंपे जा चुके हैं और परीक्षा के दिन तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा लागू रहेगा. प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी अर्धसैनिक बलों को सौंपी गई है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके.
CCTV और सोशल मीडिया पर रहेगी पैनी नजर
परीक्षा की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए देशभर के 5,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे सक्रिय रहेंगे. इन कैमरों की लाइव फीड सीधे NTA के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी, जहां विशेषज्ञों की टीम लगातार निगरानी करेगी. इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखने के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेंटर भी स्थापित किया गया है. किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अफवाह या परीक्षा से जुड़ी गलत जानकारी को तुरंत चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी. राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी भी जिला प्रशासन के साथ मिलकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे.
22 लाख छात्रों की परीक्षा, NTA ने दी राहत
इस बार NEET UG री-टेस्ट के लिए लगभग 22 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से करीब 18 लाख छात्र अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं. परीक्षा से पहले NTA ने छात्रों को एक महत्वपूर्ण राहत भी दी है. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन तकनीकी समस्या, कमजोर फिंगरप्रिंट, UIDAI कनेक्टिविटी में बाधा या किसी शारीरिक कारण से नहीं हो पाता है, तो उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा. इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी कारणों से किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो.
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