पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हाल के दिनों में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और हिंसा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने इस क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने PoJK के रावलकोट क्षेत्र में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई और लगातार बढ़ता असंतोष चिंताजनक है. भारत का कहना है कि क्षेत्र में लोगों की मूलभूत जरूरतों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है.
रोटी, बिजली और अधिकारों की मांग पर सवाल
भारत ने अपने वक्तव्य में कहा कि PoJK के लोग बेहतर जीवन सुविधाओं, बिजली, रोजगार और नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. लेकिन इन मांगों के समाधान के बजाय सुरक्षा बलों द्वारा कठोर कार्रवाई किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं. भारत ने कहा कि जनता की आवाज को दबाने की कोशिशें क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ा रही हैं.
दशकों पुरानी नीतियों पर भारत की टिप्पणी
भारतीय पक्ष ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चली आ रही नीतियों, प्रशासनिक नियंत्रण और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंधों ने क्षेत्र की स्थिति को जटिल बनाया है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को बाहरी मुद्दों पर बयानबाजी करने के बजाय PoJK में रहने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए.
रावलकोट की घटना बनी चर्चा का केंद्र
भारत द्वारा यह मुद्दा ऐसे समय उठाया गया है जब रावलकोट में हाल ही में एक सुरक्षा अभियान को लेकर विवाद खड़ा हुआ है. स्थानीय संगठनों के अनुसार 14 जून को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की थी. दावा किया गया कि इस दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें कुछ लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए.
स्थानीय संगठनों के आरोप
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAAC) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग किया. संगठन का यह भी दावा है कि कार्रवाई के बाद रावलकोट के कई हिस्सों में संचार सेवाएं प्रभावित हुईं. इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं और खाद्य सामग्री की आपूर्ति में भी बाधा आने की बात कही गई है, जिससे स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ी चर्चा
PoJK की स्थिति को लेकर भारत द्वारा UNHRC में उठाए गए सवालों ने एक बार फिर क्षेत्र में मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर बहस को तेज कर दिया है. भारत का कहना है कि क्षेत्र के लोगों की वास्तविक समस्याओं और उनकी मांगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.