Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने यह संकेत दिया है कि जिस इमारत में आग लगी, वहां सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी की गई थी. बिना आवश्यक फायर एनओसी के रेस्टोरेंट का संचालन और स्वीकृत क्षमता से कई गुना अधिक कमरे बनाकर गेस्ट हाउस चलाने जैसी बातें जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं.
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
हादसे के बाद की जांच में पता चला है कि जिस रेस्टोरेंट में आग लगी थी, उसके पास फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं थी. इतना ही नहीं, रेस्टोरेंट के ऊपर संचालित गेस्ट हाउस को केवल छह कमरों की अनुमति मिली हुई थी, लेकिन वहां कथित तौर पर 25 कमरे बनाए गए थे. अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय इमारत में कुल 47 लोग मौजूद थे. इनमें भारत के अलावा कई विदेशी छात्र और नागरिक भी ठहरे हुए थे. आग की चपेट में आने वाले लोगों में नाइजीरिया, मोजाम्बिक, लाइबेरिया और बांग्लादेश के नागरिकों की भी मौत हुई है.
चीख-पुकार के बीच बचाने की कोशिश
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इमारत के भीतर फंसे लोग मदद के लिए लगातार चिल्ला रहे थे. स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर लोगों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते चले गए. चश्मदीदों का कहना है कि इमारत की खिड़कियां और शीशे इस तरह से बंद थे कि उन्हें आसानी से खोला नहीं जा सकता था. इससे अंदर फंसे लोगों के पास बाहर निकलने के विकल्प बेहद सीमित रह गए. कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग भी लगाई.
इलेक्ट्रॉनिक लॉक बना जानलेवा बाधा?
घटना के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, इमारत में प्रवेश और निकास के लिए मुख्य रूप से एक ही दरवाजा था, जिस पर इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम लगाया गया था. स्थानीय लोगों का दावा है कि आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिसके कारण लॉक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया और दरवाजा नहीं खुल सका. यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है, तो यह हादसे के दौरान लोगों के फंसने की एक बड़ी वजह साबित हो सकता है. फिलहाल जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं.
सिलेंडर विस्फोट की आशंका पर जांच
हादसे की वजह को लेकर अभी आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है. हालांकि मैक्स हेल्थकेयर की ओर से जारी एक बयान में गैस सिलेंडर विस्फोट की आशंका जताई गई है. इसके बावजूद पुलिस और फायर विभाग अभी किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस की टीमों ने घटना के तुरंत बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था. कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. जांच एजेंसियां अब आग लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि करने में जुटी हैं.
होटल मालिक और कारोबार की जांच शुरू
इस इमारत और होटल के मालिक की पहचान लोकेश बजाज के रूप में हुई है. सूत्रों के अनुसार, होटल का संचालन तीन साझेदारों द्वारा किया जाता था. बताया जा रहा है कि इन साझेदारों के पास दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अन्य होटल और गेस्ट हाउस भी मौजूद हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया और संबंधित विभागों की निगरानी में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई.
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