राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है. कोटा के सरकारी अस्पतालों में हाल ही में सामने आए मातृ मृत्यु के मामलों के बाद राज्य के ड्रग कंट्रोल विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन’ की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. विभाग की ओर से यह कार्रवाई दवा के सैंपल के गुणवत्ता जांच में फेल होने के बाद की गई है.
राज्यभर में जारी इस प्रतिबंध के बाद ड्रग कंट्रोल विभाग की टीमों ने अलग-अलग जिलों में छापेमारी शुरू कर दी है. सिर्फ कोटा क्षेत्र से ही सरकारी अस्पतालों और सप्लाई चैन से जुड़े स्टॉकिस्टों के यहां से करीब 3500 वाइल्स जब्त किए गए हैं. विभाग अब इस बैच से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन की जांच में जुटा हुआ है.
जांच में क्या मिली गड़बड़ी?
राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय पाठक के मुताबिक, सरकारी लैब में जांच के दौरान यह पाया गया कि इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा के अनुसार ऑक्सीटोसिन कंपोनेंट मौजूद नहीं था. यानी दवा का मुख्य सक्रिय तत्व तय मानकों से कम पाया गया.
हालांकि, यह इंजेक्शन स्टेरिलिटी और बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन टेस्ट में पास हो गया था, लेकिन मुख्य सॉल्ट की कमी के कारण इसे ‘सब-स्टैंडर्ड’ यानी अमानक गुणवत्ता वाला घोषित कर दिया गया. इसी वजह से राज्य सरकार ने एहतियातन इसके उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया.
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवा में किसी भी तरह की गुणवत्ता संबंधी कमी सीधे मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है. इसलिए विभाग ने बिना देरी किए बाजार से पूरा स्टॉक हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी.
किस कंपनी का नाम आया सामने?
इस मामले में जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया है. जानकारी के मुताबिक, इसी कंपनी द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का संबंधित बैच कोटा समेत राजस्थान के कई सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किया गया था.
ड्रग कंट्रोल विभाग ने कंपनी के इस बैच को तुरंत फ्रीज करने और बाजार से वापस मंगाने के आदेश जारी किए हैं. इसके अलावा संबंधित सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से भी जवाब मांगा जा रहा है. विभाग यह भी जांच कर रहा है कि यह दवा किन-किन अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स तक पहुंची थी.
क्यों जरूरी होता है ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन?
ऑक्सीटोसिन चिकित्सा क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक इंजेक्शन माना जाता है. खासतौर पर प्रसव के दौरान इसका इस्तेमाल डॉक्टरों के लिए बेहद अहम होता है.
प्रसव पीड़ा को नियंत्रित करने में मदद
डिलीवरी के समय गर्भाशय में संकुचन बढ़ाने के लिए यह इंजेक्शन दिया जाता है. इससे सामान्य प्रसव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है और जटिलताओं को कम किया जा सकता है.
अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में अहम
डिलीवरी के बाद महिलाओं में होने वाले अत्यधिक ब्लीडिंग को नियंत्रित करने में भी ऑक्सीटोसिन बेहद अहम भूमिका निभाता है. कई मामलों में यह इंजेक्शन प्रसूता की जान बचाने में निर्णायक साबित होता है.
ऐसे में यदि दवा की गुणवत्ता में कमी हो, तो उसका असर सीधे मरीज की सेहत और इलाज पर पड़ सकता है.
कोटा में हुई मौतों के बाद बढ़ी चिंता
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में हाल ही में पांच गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले सामने आए थे. इन घटनाओं के बाद चिकित्सा व्यवस्था और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे.
हालांकि, ड्रग कंट्रोल विभाग ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि बैन किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उन मौतों से सीधा संबंध अभी तक स्थापित नहीं हुआ है. शुरुआती जांच में मौतों की वजह ‘हॉस्पिटल एक्वायर्ड इन्फेक्शन’ यानी अस्पताल में फैले संक्रमण को माना जा रहा है.
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता. यही कारण है कि जांच में अमानक पाए गए इंजेक्शन को पूरे सिस्टम से हटाने का फैसला लिया गया है.
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